बोलो जयकारा बोल मेरे श्री गुरु महाराज जी की जय , बोलो श्री नंगली निवासी सत्गुरुदेव भगवान जी की जय

Friday, April 24, 2015

सरहद पार जीता संत का सम्मान |

Fri, 24 Apr 2015 12:57 AM (IST)
आगरा। सरहद के उस पार एक भारतीय संत को उनका खोया सम्मान आखिर मिल ही गया। पाकिस्तान की सर्वोच्च अदालत ने 18 साल पहले संत परमहंस दयाल जी (अद्वैतानंद) की समाधि पर किए गए अवैध कब्जे को ध्वस्त करा दिया है। इसके साथ ही समाधि की पुनस्र्थापना और उसकी सुरक्षा के आदेश भी दिए हैं।
पाकिस्तान मुस्लिम लीग के सांसद और अधिवक्ता रमेश कुमार वंकवानी ने कई साल चली कानूनी लड़ाई के बाद भारतीय संत के सम्मान की लड़ाई जीती। 18 अप्रैल को कराची में समाधि पर किए कब्जे को ध्वस्त कर दिया। संभवत: यह पहला मौका था जब पाकिस्तानी अदालत के किसी फैसले का जश्न सरहद के इस पार भी मनाया गया। अदालत के निर्णय के बाद वहां संत के भक्तों ने पूजा अर्चना भी शुरू कर दी है। संत के अनुयाइयों ने समाधि की पुनस्र्थापना में योगदान देने की पेशकश पाकिस्तान मुस्लिम लीग के सांसद, अधिवक्ता और मुकदमे के वादी रमेश कुमार वंकवानी से की थी, लेकिन खुद संत परमहंस दयाल के भक्त सांसद ने कोई सहयोग लेने से इन्कार कर दिया। सांसद का भक्तों से कहना था कि समाधि का निर्माण वह खुद कराएंगे।
कौन हैं संत परमहंस दयाल जी
संत परमहंस दयाल जी का जन्म बिहार के छपरा में वर्ष 1844 में रामनवमी को हुआ था। 12 साल की उम्र में आत्मज्ञान प्राप्त होने के बाद उन्होंने घर छोड़ दिया। सन्यासी बनने के बाद कुछ दिन काशी में रहने के बाद लंबे अर्से तक आगरा में रहे। इसके बाद रोहतास (राजस्थान) चले गए। संत परमहंस दयाल जी ने अपना सिर्फ एक ही शिष्य बेरी जी को बनाया था। वह कराची के टेहरी नामक स्थान के रहने वाले थे। संत काशी, आगरा और रोहतास के बाद कराची अपने शिष्य के पास चले गए।
शिष्य को दीक्षा देने के बाद उसका नाम स्वरूपानंद रख दिया। स्वरूपानंद के परिजनों से अनुमति लेकर संत परमहंस 1884 में उन्हें अपने साथ आगरा ले आए। यहां न्यू आगरा के नगला पदी में जमीन खरीदी, वहां गुफा खोद शिष्य को तपस्या के लिए बैठा दिया। मान्यता है कि बाबा ने उक्त स्थान पर अपना त्रिशूल गाड़ने के बाद दीप प्रज्वलित किया था, जो आज तक जल रहा है। स्वरूपानंद जी ने 13 साल तक तपस्या की। इस दौरान संत जयपुर में रहे।
वचन निभाने लौटे थे कराची
संत परमहंस ने कराची में रहने वाले अपने भक्त सेठ अमीरचंद को वचन दिया था कि वह देह का त्याग कर उसके यहां समाधि लेंगे। शिष्य की तपस्या पूरी होने के बाद संत परमहंस सेठ अमीर चंद को दिया वचन निभाने कराची पहुंचे। उन्होंने 1919 में अपनी देह का त्याग कर समाधि ली। आजादी के पचास साल बाद तक वहां पूजा होती रही। वर्ष 1997 में कट्टरपंथियों ने समाधि को तोड़ दिया उस पर मकान बना दिया।
दंत समाधि की कहानी
आजादी के दौरान भारत-पाकिस्तान का बंटवारा होने पर सेठ अमीरचंद को कराची से छोड़ कर भागना पड़ा। वह संत परमहंस दयाल के दंत और केश अपने साथ लेकर आए थे। परमहंस दयाल जी की चौथी पीढ़ी से संबंधित स्वामी पूर्णानंद जी के मुताबिक संत की भारत में दो समाधि हैं। न्यू आगरा के नगला पदी में दंत और जयपुर में दिल्ली हाइवे स्थित लाल डोंगरी में पहाड़ पर गणेश मंदिर पर उनके केश समाधि है। जयपुर के राजा माधो सिंह समेत कई महाराजा उनके शिष्य थे। संत परमहंस के शिष्य स्वरूपानंद की समाधि मेरठ के नंगली में हैं। उनके एक हजार सन्यासी शिष्यों ने नंगली में स्वरूपानंद का भव्य मंदिर बनाया है।
गुना में सबसे बड़ा मठ
संत परमहंस अद्वैतानंद के नाम से भी प्रसिद्ध हैं। चौथी पीढ़ी के शिष्य पूर्णानंद जी ने बताया मध्य प्रदेश के गुना में परमहंस का सबसे बड़ा मठ है, 11 वर्ग किलोमीटर में फैले इस मठ में करीब पांच सौ साधु रहते हैं।
फेसबुक से मिली जानकारी
सरहद पार संत के सम्मान की कानूनी लड़ाई जीतने की जानकारी के बाद यहां रहने वाले भक्तों ने सांसद रमेश कुमार से फेसबुक के माध्यम से संपर्क किया। पूर्णानंद जी के मुताबिक उन्होंने और अन्य लोगों ने फेसबुक पर सांसद से संपर्क कर उनको बधाई दी है।

Some more links for similar news are given below  :--

1)  http://www.thehindu.com/news/international/pakistan-sc-orders-govt-to-get-temple-restored/article7112944.ece

2)  http://suddh.in/temple-restored/#.VTvYV9Kqqko

3)  http://www.outlookindia.com/news/article/pak-sc-orders-khyber-govt-to-restore-and-reconstruct-hindu-temple/892060

Wednesday, April 22, 2015

Special Thanks to Supreme Court of Pakistan.

We want to pay special thanks to Supreme Court of Pakistan for allowing the reconstruction and maintenances of smadhi sthal of Shahe-Villayat Gaus-ul hind His Holiness swami Paramhanse Dyal Advaitanand Ji Maharaj. We also thankful to the Hindu and Muslim devotees from Pakistan who tried their best efforts for this greatest spiritual cause of universal peace and prosperity. Special thanks to Dr Ramesh Kumar Vankwani, a PML-N member of the National Assembly from Tharparkar and patron of the Pakistan Hindu Council, Ex. minority MPA Gian Chand and Hindu elders from Sindh and the Saints who give their best for this spiritual cause and just because of them and the His Holiness himself devotees did daily worship and got together on the smadhi sthal on the 18th of this month. Here below are some images that we got from social- media of Teri Village of the Khyber Pakhtunkhwa i.e. KP Province of Pakistan [Karak District]. Jai Sachidanand, Jai Gurudev.  











Tuesday, April 21, 2015

At Teri, Pakistan in 1997, Shahe-Villayatt Gaus-ul hind's Miracle.

श्री परमहंस दयाल जी महाराज जी की लीला जो अभी हमे पता चली ये पत्थर जो आप देख रहे है ! ये 1997 मे कुछ मुसल्मानओं ने श्री परमहंस दयाल जी की समाधि खोली तो उन्होंने देखा की श्री परमहंस जी वैसे ही विरजामान जैसे उन्हे समाधि दी गयी थी कुछ मुसलमान डर गए और भाग गए लेकीन एक मुसल्मान जो गरीब था उसने समाधि के पास से 1 पत्थर उठा लिया जो आप नीचे दी गयी पिक्चर मे देख रहे है और उसने वो पत्थर अपनी तजोरी मेरख लिया और वो आमिर बन गया आज वो दुबई मे बैठा है । उसके सपनें में रोज श्री परमहंस दयाल जी आने लगे और कहने लगे ये पत्थर वापिस रखना है जहाँ से अपने ने लिया है। कुछ दिन पहले जो खबर अख़बार मे आई थी उसने वो खबर पढ़ी की ये तो वो हे समाधि है जहा से मैंने पत्थर उठाया था। उसी रात श्री परमहंस दयाल जी उसके सपने मेंआएं और कहा की ये पत्थर आपको रमेश जी को वापिस करना है । जिसने ये सब प्रयास किया है.! जब उसने ये पत्थर उठाया था! तो छोटा था अब ये 1.5 इंच बड़ा हो गया है और 1 पत्थर के 2 पत्थर बन गए है। आप सभी नीचे देख सकते है।जिसने भी ये प्रयास किया हम सभी उसका शुक्रिया अदा करते है। श्री नंगली निवासी भगवान जी का सपना था की वे अपने गुरुदेव की समाधि पर हीरे जवाररहत चढ़वाते उन्होंने भगत अमीर चंद जी से कहा था आप मुझसे लाख रूपये ले लो लेकीन मुझे अपने गुरुदेव की समाधि दे दो।लेकीन वो नहीं माने लेकीन आज उनका सपना साकार रूप लाएगा। बोलो जैकारा बोल मेरे श्री गुरुमहाराज की जय।।।।




Monday, April 20, 2015

Jai hind, Jai Shahe-Villayat Gaus-ul hind.


http://www.dawn.com/news/1176474/sc-asks-kp-govt-to-get-hindu-temple-rebuilt

SC asks KP govt to get Hindu temple rebuilt


ISLAMABAD: The Supreme Court ordered on Thursday the Khyber Pakhtunkhwa government to get a Hindu temple in Karak restored and reconstructed.
The order came after Additional Advocate General Waqar Ahmed told a two-judge Supreme Court bench headed by Chief Justice Nasir-ul-Mulk that efforts were being made for an amicable settlement of the matter.
Read: SC asks KP to take steps for reconstruction of temple
Dr Ramesh Kumar Vankwani, a PML-N member of the National Assembly from Tharparkar and patron of the Pakistan Hindu Council, had invited the attention of the apex court to the frequent incidents of desecration of Hindu temples in the country, especially occupation of Shri Paramhans Ji Maharaj’s Samadhi in Teri village of Karak district by an influential mufti.
Dr Vankwani said he had met the provincial chief secretary, the inspector general of police and the local commissioner, but he had been informed that the Hindu notable in whose name the temple was built had converted to Islam. Besides, if the temple was allowed to be constructed it would encourage “sleuths of Indian intelligence agency RAW to settle in the area”.
Also read: Supreme Court’s attention drawn to desecration of Hindu temples
But the court reiterated its order issued on March 11 and directed the KP government to restore and preserve the Karak temple.
Dr Vankwani argued that the local community acknowledged the right of the Hindu community over the temple, but local religious leaders had resisted its reconstruction.
A letter written by the-then deputy commissioner of Karak to a deputy secretary of the provincial home department in Feb 2014, which was submitted to the Supreme Court, had traced the history of the unrest in the area.
According to the document, a Hindu shrine was constructed at a place where Shri Paramhans Ji Maharaj died in 1919 and buried in Teri village. His followers used to visit the place to pay their respects and the practice continued till 1997 when some Muslim fanatics dismantled the temple.
Consequently, followers of Shri Paramhans Ji tried to build the temple on the place allegedly occupied by a local religious leader even though the property belonged to the Auqaf department.
Hindu elders from Sindh then intervened and tried to negotiate and even paid Rs375,000 as cost of the land to the mufti in 1997. But despite receiving the money from then minority MPA Gian Chand, the mufti did not vacate the property.
The MPA met the-then KP chief minister to seek his support for getting back the land. Several meetings between ulema led by local notable Maulana Mohammad Sharif and Hindu elders from Sindh were held but the Maulana, who had a great influence in Banda Daud Shah tehsil, was not ready to let the Hindus get their right.
A meeting presided over by Maulana Sharif and attended by about 75 ulema decided on Feb 15 this year that a committee would meet JUI-F chief Maulana Fazlur Rehman and inform him about the resentment of Muslims against reconstruction of the temple.
But the meeting, which did not fix any date for the meeting with Maulana Fazl, also decided that in the wake of the current law and order situation the permission for reconstruction of the temple could not be granted, said the letter submitted during the last hearing.
Dr Vankwani told the court that the federal government had placed before the National Assembly a Hindu Marriage Bill, but parliament could not adopt it until the provincial assemblies passed resolutions in this regard.
The Supreme Court requested the provincial assemblies to consider passing the required resolutions and submit their report to it in a month.
Published in Dawn, April 17th, 2015
































Saturday, April 18, 2015

Supreme Court of Pakistan must reply, "Are these advices of 'His Holiness Paramhanse Dyal Advaitanand Ji Maharaj "Shahe-Villayatt, Gaus-ul Hind"' are as per ISLAM ?"

Supreme Court of Pakistan must reply, "Are these advices of 'His Holiness Paramhanse Dyal Advaitanand Ji Maharaj "Shahe-Villayatt, Gaus-ul Hind"' are as per ISLAM ?" If Not Then why "local commissioner, Muslim fanatics, local religious leaders viz Mufti, 75 ulema led by local notable Maulana Mohammad Sharif, JUI-F chief Maulana Fazlur Rehman, provincial assemblies and even the Auqaf department to whom the property belonged to" of the Khyber Pakhtunkhwa i.e. KP Province of Pakistan [Karak District]" are insisting that His Holiness converted in ISLAM ? Even Samdhi was built not the Kabr of His Holiness. Why they are afraid of Indian Intelligence agency 'RAW' ? Are they dictator of Pakistan ? Why they are against reconstruction of the temple and not ready to let the Hindus get their right ? Don't worry construction would encourage the peace and harmony in KP Province. Please we, from India requested everybody that Let's come forward and rebuild the Temple. 
Majhab nahi sikhata, aapas mein bair rakhna, Saints are not particular to any religion.
Thanks.




श्री परमहंस दयाल जी महाराज जी का निजधाम सिधारना |