बोलो जयकारा बोल मेरे श्री गुरु महाराज जी की जय , बोलो श्री नंगली निवासी सत्गुरुदेव भगवान जी की जय
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Tuesday, April 21, 2015

At Teri, Pakistan in 1997, Shahe-Villayatt Gaus-ul hind's Miracle.

श्री परमहंस दयाल जी महाराज जी की लीला जो अभी हमे पता चली ये पत्थर जो आप देख रहे है ! ये 1997 मे कुछ मुसल्मानओं ने श्री परमहंस दयाल जी की समाधि खोली तो उन्होंने देखा की श्री परमहंस जी वैसे ही विरजामान जैसे उन्हे समाधि दी गयी थी कुछ मुसलमान डर गए और भाग गए लेकीन एक मुसल्मान जो गरीब था उसने समाधि के पास से 1 पत्थर उठा लिया जो आप नीचे दी गयी पिक्चर मे देख रहे है और उसने वो पत्थर अपनी तजोरी मेरख लिया और वो आमिर बन गया आज वो दुबई मे बैठा है । उसके सपनें में रोज श्री परमहंस दयाल जी आने लगे और कहने लगे ये पत्थर वापिस रखना है जहाँ से अपने ने लिया है। कुछ दिन पहले जो खबर अख़बार मे आई थी उसने वो खबर पढ़ी की ये तो वो हे समाधि है जहा से मैंने पत्थर उठाया था। उसी रात श्री परमहंस दयाल जी उसके सपने मेंआएं और कहा की ये पत्थर आपको रमेश जी को वापिस करना है । जिसने ये सब प्रयास किया है.! जब उसने ये पत्थर उठाया था! तो छोटा था अब ये 1.5 इंच बड़ा हो गया है और 1 पत्थर के 2 पत्थर बन गए है। आप सभी नीचे देख सकते है।जिसने भी ये प्रयास किया हम सभी उसका शुक्रिया अदा करते है। श्री नंगली निवासी भगवान जी का सपना था की वे अपने गुरुदेव की समाधि पर हीरे जवाररहत चढ़वाते उन्होंने भगत अमीर चंद जी से कहा था आप मुझसे लाख रूपये ले लो लेकीन मुझे अपने गुरुदेव की समाधि दे दो।लेकीन वो नहीं माने लेकीन आज उनका सपना साकार रूप लाएगा। बोलो जैकारा बोल मेरे श्री गुरुमहाराज की जय।।।।